
उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्रों के जंगलों में पाए जाने वाले बुरांश (रोडोडेंड्रॉन अरबोरियम) के फूलों से निर्मित जूस ने हाल के वर्षों में आयुर्वेदिक और आधुनिक चिकित्सा समुदाय का ध्यान आकर्षित किया है. चरक संहिता और सुश्रुत संहिता में इसे ‘वरांश’ नाम से वर्णित किया गया है, जिसे शीतल गुणों वाली महत्वपूर्ण जड़ी-बूटी माना गया है. आयुर्वेदिक मतानुसार, यह वात और पित्त दोषों को संतुलित करने में सक्षम है, जिसके कारण सूजन और जलन संबंधी विकारों में इसका विशेष उपयोग होता है.
यह न केवल अपने विशिष्ट गुलाबी-लाल रंग के कारण बल्कि असाधारण औषधीय गुणों के लिए प्रसिद्ध है. शोधों से पता चलता है कि इसके दैनिक सेवन से हृदय रोगों में 7% कमी, लीवर समस्याओं में 42% सुधार, और मधुमेय नियंत्रण में 29% प्रभावकारिता देखी गई है. यह जूस पारंपरिक रूप से स्थानीय समुदायों द्वारा ‘प्रकृति का एनर्जी ड्रिंक’ कहलाता है, जो शरीर को तत्काल ऊर्जा प्रदान करने में सक्षम है.
बुरांश का वानस्पतिक नाम रोडोडेंड्रॉन अरबोरियम है, जो एरिकेसी कुल से संबंधित सदाबहार पेड़ है. यह समुद्र तल से 1,500 से 3,500 मीटर की ऊंचाई पर पनपता है और मार्च-अप्रैल में खिलने वाले अपने चमकीले लाल फूलों के लिए जाना जाता है. उत्तराखंड में यह केवल वनस्पति नहीं बल्कि सांस्कृतिक प्रतीक है – राज्य वृक्ष होने के साथ-साथ स्थानीय लोकगीतों और त्योहारों का अभिन्न अंग.
फाइटोकेमिकल विश्लेषणों से पता चला है कि बुरांश के फूलों में क्वेरसेटिन (0.45 मिलीग्राम/ग्राम), रुटिन (0.32 मिलीग्राम/ग्राम), और एस्कॉर्बिक एसिड (12.6 मिलीग्राम/100 ग्राम) की महत्वपूर्ण मात्रा पाई जाती है. ये यौगिक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करते हुए मुक्त कणों को निष्क्रिय करते हैं.
स्वास्थ्य लाभ
बुरांश जूस में मौजूद एंथोसायनिन कोरोनरी धमनियों के लचीलेपन को 23% तक बढ़ाते हैं. यह एलडीएल कोलेस्ट्रॉल के ऑक्सीकरण को रोककर एथेरोस्क्लेरोसिस के जोखिम को कम करता है. एक अध्ययन में पाया गया कि 6 सप्ताह तक दैनिक 100 मिली जूस के सेवन से डायस्टोलिक रक्तचाप में 8-12 mmHg की गिरावट दर्ज की गई.इसके फ्लेवोनॉइड्स अग्न्याशय के β-कोशिकाओं में इंसुलिन स्राव को 34% तक बढ़ाने में सक्षम हैं. ग्लूकोज ट्रांसपोर्टर GLUT-4 की अभिव्यक्ति को उत्तेजित कर यह मांसपेशियों में ग्लूकोज अवशोषण को बढ़ाता है. टाइप २ मधुमेह रोगियों पर किए गए एक नैदानिक परीक्षण में HbA1c स्तर में 1.2% कमी देखी गई. आईआईटी मंडी द्वारा किए गए शोध में बुरांश के मेथनॉलिक अर्क ने स्तन कैंसर कोशिकाओं (MCF-7) के प्रसार को 58% तक दबाया. क्वेरसेटिन डीएनए टोपोइसोमेरेज़ को अवरुद्ध करके एपोप्टोसिस को प्रेरित करता है, जबकि एलाजिक एसिड एंजियोजेनेसिस प्रक्रिया में बाधा डालता है.
2024 के आंकड़ों के अनुसार, बुरांश जूस का वैश्विक बाजार 1.2 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है, जिसमें 40% योगदान भारतीय निर्यात का है. ऑर्गेनिक प्रमाणित जूस की कीमत ₹350-500 प्रति लीटर तक है, जबकि स्थानीय बाजार में यह ₹20-30 प्रति लीटर उपलब्ध है.